मैं हूँ ५ बार बोलो - An Overview




अगले दिन प्रात:काल वह परीक्षा के लिए दरवाजे पर खड़ा हो गया। दासी ने भोजन लाकर सामने रखा। एक बासी रोटी का टुकड़ा, जो बच रहा था, नीचे गिर पड़ा। मुर्गा तो ताक में लगा हुआ था ही, तुरन्त उड़ा ले गया। कुत्ते ने शिकायत की, "तू कच्चे गेहूं भी चुग सकता है। मैं दाना नहीं चुग सकता। ऐ दोस्त!

इधर जब वह माली सैयद से भी निबटन चुका तो मौलवी की ओर मुड़ा और कहा, "ऐ मौलवी, ! तू सारे धूर्तों का सरदार है। खुदा तुझे लुंजा करे। क्या तेरा यह फतवा है कि किसी के बाग में घुस आये और आज्ञा भी न ले?

परन्तु तूने अपनी खामोशी से मुझे हैरान कर दिया, और बिना कारण बताए बदन पर घूंसा मारने लगा। ऐ परोपकारी पुरुष! जो कुछ गलती से मेरे मुंह से निकल गया, उसके लिए मुझे क्षमा करना।"

दूसरा कहने लगा, "मेरी आंखों में ऐसी शक्ति है कि जिसे अंधेरे में देख लूं, उसे फिर कभी नहीं भूल सकता। और दिन के देखे को अंधेरी रात में पहचन सकता हूं। बहुत से लोग हमें पचानकर पकड़वा दिया हैं। मैं ऐसे लोगों को तुरन्त भांप लेता हूं और अपने साथियों को सावधान कर देता हूं। इस तरह हमारी रक्षा हो जाती है।"

Skeptical Inquirer magazine criticized The dearth of falsifiability and testability of those statements.[ten] Physicist Ali Alousi, for instance, criticized it as unmeasurable and questioned the probability that views can have an affect on anything at all outdoors The pinnacle.[eleven] Furthermore, critics have asserted which the proof delivered is generally anecdotal Which, due to the self-choosing character from the favourable stories, in addition to the subjective nature of any results, these reviews are prone to confirmation bias and assortment bias.[12]

हजरत उमर न फरमाया, "यह आग भगवान के कोप का चिह्न है और यह तुम्हारी कंजूसी की आग का एक शोला हैं। इसलिए पानी छोड़ दो और रोटी बांटना शुरू करो। यदि तुम भविष्य में मेरी आज्ञा का पालन करना चाहते हो तो मंजूसी से हाथ खींच लो।"

Scholars have utilized other adjectives with similar meanings, for example unconscious, preconscious, and nonconscious, to explain mental processing without the need of acutely aware awareness. The distinctions amid these phrases are subtle, nevertheless the phrase subconscious refers to equally psychological processing that occurs underneath awareness, including the pushing up of unconscious material into consciousness, and also to associations and material that reside under aware awareness, but are effective at becoming aware all over again.[8]

कृपया पढ़ें: एक व्यक्तिगत अनुरोध विकिपीडिया के संस्थापक जिमी वेल्स से। देवनागरी में लिखने के लिए सहायता

हजरत लुकमान ने जवाब दिया, "मैंने आपके हाथ से इतने स्वादिष्ट भोजन खाये हैं कि लज्जा के कारण मेरा सिर नीचे झुका जाता है। इसीसे मेरे दिल ने यह गवारा नहीं किया कि कड़वी चीज आपके हाथ से न खाऊं। मैं केवल कड़वेपन पर शोर मचाने लगूं तो सौ रास्तों की खाक मेरे बदन पर पड़े। ऐ मेरे स्वामी, आपके सदैव शक्कर प्रदान करने वाले हाथ ने इस खरबूजे में कड़वाहट कहां छोड़ी थी कि मैं इसकी शिकायत करता!" १

यह सुनकर बादशाह मुस्कराया और बोला, "अच्छा! तुमको माफ किया जाता है। आगे से ऐसा काम मत करना।"

एक लड़का अपने बाप के ताबूत पर फूट-फूटकर रोता ओर सिर पीटता था, "पिताजी, लोग तुम्हें ले जा रहे हैं? ये तुम्हें एक अंधेरे गड्ढे में डाल देंगे, जहां न कालीन है, न बोरिया है, न वहां रात को जलाने के लिए दीपक है, न खाने के लिए भोजन। न इसका Subconscious Mind Power दरवाजा खुला more info है, न बन्द है। न वहां पड़ोसी हैं, जिससे सहारा मिल सके। तुम्हारा पवित्र शरीर, जिसे सम्मानपूर्वक लोग चूमते थे, उस सूने और अंधेरे घर में, जो रहने के बिल्कुल अयोग्य है, जिसमें रहने से चेहरे का रूप और सौन्दर्य जाता रहता है, क्योंकर रहेगा?

बादशाह का नियम था कि रात को भेष बदलकर गज़नी की गलियों में घूमा करता था। एक रात उसे कुछ आदमी छिपछिप कर चलते दिखई दिये। वह भी उनकी तरफ बढ़ा। चोरों ने उसे देखा तो वे ठहर गये और उससे पूछने लगे, "भाई, तुम कौन हो? और रात के समय किसलिए घूम रहे हो?" बादशाह ने कहा, "मैं भी तुम्हारा भाई हूं और आजीविका की तलशा में निकला हूं।" चोर बड़े प्रसन्न हुए और कहने लगे, "तूने बड़ा अच्छा किया, जो हमारे साथ आ मिला। जितने आदमी हों, उतनी ही अधिक सफलता मिलती है। चलो, किसी साहूकार के घर चोरी करें।" जब वे लोग चलने लगे तो उनमें से एक ने कहा, "पहले यह निश्चय होना चाहिए कि कौन आदमी किस काम को अच्छी तरह कर सकता है, जिससे हम एक-दूसरे के गुणों को जान जायं जो ज्यादा हुनरामन्द हो उसे नेता बनायें।"

आदमी निवेदन किया, "अच्छा, सारे जानवरों की बोली न सही कुत्ते की, जो मेरे दरवाज़े पर रहता है और मुर्ग की, जो घर में पला हुआ है, बोलियां जान here लूं तो यही काफी है।"

बादशाह ने कहा, "अपने साथी की प्रशंसा में अति न कर और दूसरे की प्रशंसा के सहारे अपनी प्रशंसा न कर, क्योंकि यदि परीक्षा के लिए इसे मैं तेरे सामने बुलाऊं तो तुझको लज्जित होना पड़ेगा।"

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