5 Simple Techniques For Subconscious Mind Power




हजरत मूसा ने कहा, "जा, अब अपने को भी बेचकर नुकासन से बच जा। तू तो इस काम में खूब चालाक हो गया है। अब की बार भी अपनी हानि दूसरी लोगों के सिर डाल दे और अपनी थैलियों को दौलत से भर ले। भवितव्यता तुझे इस समय शीशे में दिखाई दे रही है, मैं उसको पहले ही ईंट में देख चुका था।"

फिर उसने निवदन किया।"ऐ पवित्र आत्मा! आप जो चाहें कर सकते हैं, फिर आपको किसका डर है?"

परन्तु तूने अपनी खामोशी से मुझे हैरान कर दिया, और बिना कारण बताए बदन पर घूंसा मारने लगा। ऐ परोपकारी पुरुष! जो कुछ गलती से मेरे मुंह से निकल गया, उसके लिए मुझे क्षमा करना।"

इसमें तो कोई संतोष की बात नहीं है। तूने खाने से बचने के लिए कोई बहाना क्यों नहीं किया?"

१ ग्रन्थकारिता ७.२ धर्म ७.३ लिंग आधार ८ कार्यों की सूची ८.१ नाटकों का वर्गीकरण ८.२ कार्य ९ साहित्यिक प्रशंसा १० नोट्स ११ सन्दर्भ १२ अग्रगामी पठन/ अध्ययन १३ वाह्य संपर्क / कड़ी

इस तरह बहुत-सी बातें करके बादशाह ने उस कुरूप गुलाम की अच्छी तरह परीक्षा कर ली और जब पहला गुलाम स्नान करके बाहर आया तो उसको अपने पास बुलाया। बदसूरत गुलाम को वहां से बिदा कर दिया। उस सुन्दर गुलाम के रूप और गुणों की प्रशंसा करके कहा, "मालूम नहीं, तेरे साथी को क्या हो गया था कि इसने पीठ-पीछे तेरी बुराई की!"

सूफी तो गफलत में पड़ा हुआ था और खच्चर पर वह मुसीबत आयी कि ईश्वर दुश्मन पर भी न डाले। उस बेचारे को तैरु वहां की धूल और पत्थरों में घिसटकर टेढ़ा हो गया और बागडोर टूट गयी। बेचारा दिन भर का हारा-थका, भूखा-प्यास मरणासन्न अवस्था में पड़ रहा। बार-बार अपने मन में कहता रहा कि ऐ धर्म-नेताओं!

उसने कहा, "क्या तुम मसीहा नहीं हो, जिनके चमत्कार से अन्धे देखने लगते हैं और बहरों को सुनायी देने लगता है?"

एक ऐसा गुण, जो सबसे तुच्छ है, मैं बतलाता हूं, क्योंकि संक्षिप्त बात ही लाभकारी होती है।"

अगर तू मेरे प्राणों का ही गाहक है तो तलवार के एक ही वार से मेरा जीवन समाप्त कर दे। वह भी क्या बुरी घड़ी थी जबकी मैं तुझे दिखाई दिया।"

जल्दी उठो। मार-पीट या पकड़-धकड़ से पहले ही निकल भागें।" बहरे ने कहा, read more हां, इनके पैरों की आवाज निकट होती जाती है।" तीसरा बोला, "दोस्तो होशियार हो जाओ और भागो। कहीं ऐसा न हो वे मेरा पल्ला कतर लें। मैं तो बिल्कुल खतरे में हूं!"

[संपादित करें] नाजुक प्रतिष्ठा "वो सिर्फ़ एक उम्र का नही था, बल्कि हर समय का था."

मच्छर ने कहा, "बेशक, आपका कथन सत्य है, पर हमारे ऊपर कृपा-दृष्टि रखना भी तो श्रीमान ही का काम है। दया कीजिए और दुष्ट वायु के अत्याचारों से हमारी जाति को बचाइए।"

" इस प्रकार सैयद को जाने क्या-क्या बुरा भला कहा। मौलवी चुपचाप सुनता रहा, तब उस दुष्ट ने सैयद का भी पीछा किया और रास्ते में रोककर कहा, "अरे मूर्ख! इस बाग में तुझे किसने बुलाया? अगर तू नबी सन्तान होता तो यह कुकर्म न करता।"

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